पढ़े यह महत्वपूर्ण लेख सरकार का मनमाने तरीक़े से धारा 370 को ख़त्म करना कश्मीर की जनता के साथ धोखा है...



✍️किशन कुमार जोशी
साथियों सबसे पहले तो मैं सरकार द्वारा कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्‍त करने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सो में बाँटने के जोरदार तानाशाही से भरे क़दम की कठोर शब्दों में भर्त्‍सना करता हूँ।
कोई मुझे आंतकवादी या राष्ट्रद्रोही या पाकिस्तानी घोषित करें उससे पहले मैं बता देता हूँ कि मैं कश्मीर को भारत से अलग करने के पछ में नहीं हूँ न ही पाकिस्तान को सौंपने के बल्कि मैं भारत मैं समस्त कश्मीरियों को विस्वास दिलाकर भारत मे मिलाना चाहता हूँ कि तुम भी भारतीय हो तुम में और हममें फर्क नहीं, कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत एक हो यह मेरा सपना है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार के इस तानाशाही भरे कदम से कश्मीर में ऐसी आग लगाई जा रही है जो आनेवाले भविष्य में पूरे देश को प्रभावित करेगी।
यह लेख केवल उनके लिए है जिनके दिल में थोड़ी बहुत इंसानियत अभी जिंदा है और दिमाग मे गुलामी की जगह आज़ाद सोच है।
साथियों सरकार के इस फैसले से धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा मिलेगा साथ मे धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों के बंटवारे को भी मोदी सरकार और बढ़ायेंगी और एक ऐसा माहौल पैदा करेगी कि धर्म खतरे में हैं, कश्मीर खतरे में हैं, देश ख़तरे में हैं, युवाओं को पूरी तरह अपने जाल में झूठ के सहारे फंसा लेगी और जनता का ध्यान भटका कर वो पूरी कोशिश करेगी कि अपनी सारी नाकामियों को छिपा डालें और यह बड़ा आसानी से हो भी जाएगा क्योंकि कश्‍मीर मामले का पाकिस्‍तान के जुड़े होने के कारण यह एक ऐसा मामला है जिसको धार्मिक दंगो में युवाओं को धकेलने से लेकर पाकिस्‍तान-विरोधी अन्‍ध राष्‍ट्रवाद के लिए काम मे लिया जा सकता है। पाकिस्तान का शासक वर्ग भी इस समय संकट की परिस्थितियों से गुजर रहा है और उसके अंदर भी बेरोजगारी, आर्थिक मंदी का दौर है और उसे भी इस तनाव की उतनी ही ज़रूरत है जितनी भारत के शासक वर्गों को यानी वहाँ भी भारत के विरोध में एक माहौल पैदा किया जाएगा की हिंदुस्तान में मुस्लिम सुरक्षित नहीं, मुसलमानो को अधिकार नहीं ऐसे ऐसे झूट बोलकर पाकिस्तान के राजनेता भी अपने देश के युवाओं को केवल सरकार के इशारे पर नाचने वाले चरणवन्दक बनाएंगे कश्‍मीर का मामला दोनों देशों के शासक वर्गों के लिए अपनी नाकायामियों को छुपाने का सबसे बेहतरीन तरीका है जिससे जनता का बुनियादी मुद्दों से ध्‍यान भटकाया जा सकता है और समय समय पर देशभक्ति सिद्ध करने के लिए कश्मीर की जनता के हितों की बलि भी बार-बार चढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही अंतराष्ट्रीय राजनीतिक देशों को भारतीय मामलों में हस्‍तक्षेप करने और दोनों देश के बीच तनाव की आँच पर अपनी रोटियाँ सेंकने का मौक़ा भी मिल जायेगा जैसे अमेरिका को मिला ट्रम्प का मध्यस्ता को लेकर ब्यान ही कश्मीर में कुछ बड़ा करने का दबाव बना गया वैसे भी सभी देशों में हथियारों की होड़ और सैन्‍य ख़र्च में भारी बढ़ोत्‍तरी हुई है जिसके कारणवंश ही संकट से चरमराती अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ने लगा है सभी देशो पर भारत भी इसी बोझ को वहन कर रहा है लेकिन आखिर में पड़ना देश की जनता की उसी कमर पर ही है जो पहले से ही नोटबन्दी, Gst से टूटी पड़ी है।
साथियों मेरा मानना है कि यह फैसला मनचाहे ढंग से लिया गया है जो आनेवाले भविष्य में भारत को शतप्रतिशत प्रभावित करेगा मैं फिर कह रहा हूँ कोई मुझे आंतकवादी या राष्ट्रद्रोही या पाकिस्तानी घोषित न करें मैं भी पूरे देश की जनता की तरह कश्मीर को भारत से अलग करने की चाह नहीं रखता बल्कि उसे भारत मे विस्वास दिलाकर कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत एक हो यही मेरा कहना है है लेकिन यहाँ पर मेरे कहने न कहने की बात नहीं है यहाँ तय करने का जो भी हक है वो कश्मीरियों का है और वह किसी और का नहीं, उन्हें आत्मनिर्णय लेने का हक है जिससे अभी उनको वंचित कर दिया है और उनकी किसी भी निजी सहमति के बिना अनुच्छेद 370 पर फैसला कश्मीर की जनता से धोखा नहीं तो क्या है ? इसे विश्‍वासघात नहीं कहते तो क्या कहते हैं ? अपने आप को एक कश्मीरी नागरिक की जगह रखकर देखो। जम्‍मू-कश्‍मीर से विशेष राज्‍य के दर्जे को छीनना और जम्‍मू-कश्‍मीर को अधूरे अधिकारों के बल पर और लद्दाख को विधानसभा रहित केन्‍द्र-शासित प्रदेशों में बदल दिया जाना इससे आपको यह समझ आना चाहिए कि इसका सीधा सा अर्थ है कि वहाँ पर सीधे केन्‍द्र का शासन होगा जो वहाँ की जनता को बार बार यह अहसास कराएगा की आप बाकियों से अलग है और तो और मुझे ऐसा लगता कि ऐसी परिस्थितियों में सेना का भारी प्रयोग ही शासन का सबसे बड़ा हथियार होगा आप खुद से महूसस करें कि आपको  चारों और से हथियारों से लैस सेनिको के बीच हमेशा के लिए जीना है ख़ौफ़ का मंजर आपके दिमाग मे हर पल बैठा रहेगा ऐसा मेने पहले टीवी पर ईरान, बगदाद में देखा था तब मैं उनके लिये भगवान से प्रार्थना करता था वी छोटे छोटे बच्चों पर तनी बंदूके का टीवी वाला सीन अभी भी तरोताज़ा हो जाता है ऐसे में मैने कई देशों के इतिहास को भी थोड़ा बहुत जाना है औऱ मेने पढा है कि सैनिकों के बल पर किसी छोटे-से छोटे तबके की भी समस्त जनता को लम्‍बे समय तक डरा धमका कर नहीं रखा जा सकता लेकिन मुझे फिर भी हैरानी है कि देश के बुद्धिजीवियों को फिर भी कोई आपत्ति नहीं हैं चारों औऱ बधाइयाँ बाँटी जा रही है। कश्मीरी की जनता ने आज़ादी के वक्त सेकुलरिज्म की राजनीतिक को चुना था जबकि वो जिन्ना की राजनीति औऱ राजाओं की कूटनीति के पछ में भी हो सकते थे लेकिन भारत मे कश्मीर के विलय के समय कब‍ायलियों के हमले की परिस्थितियों में इसका भारत से विलय हुआ जिसमें उसे अलग संविधान, अलग झण्‍डा व विशेष राज्‍य का दर्जा भी प्राप्‍त हुआ इसलिए कश्मीर का भारत से जुड़ाव बताने के लिए अनुच्छेद 370  को बहुत बार दर्शाया भी जा चुका है लेकिन अब इसे इस तरह खत्म करने से आज़ादी में विलय करते समय मे प्राप्त हुए में वो विशेष राज्य का दर्जा, 35ए प्रभावित होकर अपना प्रभाव खो देंगे औऱ सविधान भी खारिज हो जाएगा अब देखा जाए तो अनुच्छेद 370 को एक तरफा खत्म करने से भारत और कश्मीर के रिश्ते भी खत्म दिखते हैं मेरा आशय जो भारतीय एकीकरण में कश्मीर ने भागीदारी दी वो रद्द हो जाती है जैसा कि मैने बताया कि भारत और कश्मीर के जुड़ाव का मुख्य कारण ही अनुच्छेद 370 था। 26 अक्‍टूबर 1947 को जो हस्‍ताक्षर ‘इंस्‍ट्रूमेंट ऑफ़ एक्‍सेशन’ पर किये गए जिससे कश्‍मीर का विलय हुआ था उसमें कश्‍मीरी जनता को किये गये वादे पूरे भी नहीं किये गए और एक तरफा जबरदस्ती उसके अधिकार को भी ख़ारिज कर दिया जिसमें किसी भी कश्मीरी नागरिक से सहमति लेना भी उचित नहीं समझा गया और न ही पुरे देश की जनता से व्यापक सहमति लेने को कोशिश की गयी इस फैसले से कश्‍मीर घाटी की आबादी तो अलग-थलग होगी ही साथ ही इस तानाशाही से भरे क़दम से जम्‍मू और लद्दाख के में रहने वाली आबादी का भी बंटवारा हो जाएगा। सेना का दबाव जितना बढ़ेगा, निराशा और दिशाहीनता के उस माहौल में उस पूरे क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा औऱ भी ज्यादा मिलेगा जिसका परिमाण यह होगा की कश्‍मीरी जनता के साथ पूरे देश की जनता को भी आंतकवाद की मार झेलनी होगी एक और बात घाटी से हटाये गए कश्‍मीरी पंडित परिवारों की वापसी की राह भी इस फैसले के बाद और मुश्किल हो जायेगी।
अब यह बात सबके सामने आ चुकी है कि भारत की आर्थिक मन्‍दी अपने उच्च स्तर में है और अर्थव्‍यवस्‍था दिवालिया होने के कगार पर पहुँच चुकी है। आज़ाद भारत के गम्‍भीरतम आर्थिक संकट का असर भयंकर बेरोज़गारी और उत्‍पादक गतिविधियों के ठहराव के रूप में सामने दिख रहा है और आने वाले समय में इस संकट का भीषण रूप भी आम जनता पर ही टूटेगा जो मुझे काँच की भाँति साफ दिख रहा है। देशी-विदेशी पूँजी की सेवा में मोदी सरकार का हर क़दम संकट को और गम्‍भीर बना रहा है। ऐसे में इस सरकार के पास साम्प्रदायिकता, झूठी खबरें अन्‍धराष्‍ट्रवाद भड़काने और युद्ध का माहौल पैदा करने के अलावा कोई रास्‍ता नहीं बचा है। आने वाले कुछ महीनों में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं और मोदी सरकार उसी की तैयारी कर रही है ताकि आगे विधानसभा चुनावों में वोटों की फसल अच्छी हो। कश्‍मीर मामले में अचानक उठाये गये इस तानाशाही भरे क़दम के पीछे फिलहाल तो यही लग रहा है जिसके चलते पूरे कश्मीर की जनता को एक भयंकर उथल-पुथल की ओर धकेल दिया गया है।
मेरा मानना है कि अगर इंसानियत जरा भी जिंदा है तो अब इस देश कि जनता को और जागरूक युवाओं को नेताओं की चरण वन्दना छोड़ कर कश्‍मीरी जनता के साथ हुए अन्याय के लिए एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए । सभी जागरूक युवाओं को जनता को अंधभक्त बनने से रोकना चाइए व एक लोकतांत्रिक नागरिक कर कर्त्तव्यों व हितों को बताना चाहिए तब जाकर इस देश मे दिमाग मे जहर भरने का काम करने वाले धर्म के ठेकेदार की असलियत उजागर होगी इसके लिए सभी युवा साथियों को जनता के बीच उतरना होगा साथ ही, हमें कश्‍मीरी लोगों तथा धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की हिंसा और दुष्‍प्रचार को नाकाम करने के लिए सचेत और सक्रिय रहना होगा किसी भी तरह के झाँसे में आये बगैर इंसानियत को बचाना होगा।

यहाँ व्यक्त किये गए सभी विचार मेरी निजी अभिव्यक्ति हैं,इस लेख की पूर्ण जिम्मेदारी मेरी है - किशन कुमार जोशी।

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