देश में, धर्म मे, साम्प्रदाय में, लोकतंत्र में अगर इंसानियत को जरा भी जिंदा रखना है और एकता एकजुटता अखण्डता व प्रेम बनाये रखना है तो अब इस देश कि जनता को और जागरूक युवाओं को हर प्रकार के नेताओं की चरण वन्दना छोड़ कर सच को सहन करना व सच सबको दिखाना जरूरी है साथ ही जरूरी है उसका सवाल करना , अगर सवाल करना नहीं आता है तो सीखना होगा क्योंकि जनता में प्रसाद की तरह बंटता राजनीतिक झूट जो जातिवाद के अलावा बहुत सी जहरीली सोच को लोगो मे भर चुका है।
और ऐसा अब से नहीं लम्बे अरसे से भिन्न - भिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियों के लोग एक फायदे को फलस्वरूप पाने के लिए कर रहे हैं और अब वो एक कैंसर की तरह सबके गले तक पहुँच चुका है क्योंकि
हमने पहले इसे रोकने की जगह या तो इसे समर्थन दिया या इसे यूँ ही नजरअंदाज किया लेकिन अब इसके लिए एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए, सभी जागरूक युवाओं को जनता को जातिवादी बनने से रोकना चाइए व एक लोकतांत्रिक नागरिक के कर्त्तव्यों व हितों को बताना चाहिए तब जाकर इस देश मे दिमाग मे जहर भरने का काम करने वाले जाती के ठेकेदारों की असलियत उजागर होगी इसके लिए सभी युवा साथियों को जनता के बीच में उतरना होगा बात करनी होगी बिना संकोच के साथ हर विचारधाओं वाले व्यक्तियों को अपना मानना होगा।
हमें गाँव, शहर, देश के लोगों के स्तर पर जातीवाद के समर्थन में किसी भी तरह की हिंसा और दुष्प्रचार को नाकाम करने के लिए सचेत और सक्रिय रहना होगा किसी भी तरह के झाँसे में आये बगैर जातिवाद को खत्म करने के लिए स्टेण्ड लेना ही होगा वर्ना कालान्तर में इसके परिणाम काफ़ी दुःखद होंगे क्योंकि जनता अपने ऊपर हो रहे शोषण के खिलाफ उठते आवेश को यूँ ही आपस मे लड़कर जाया कर लेगी।
पोस्ट में व्यक्त सभी विचार मेरी व्यक्तिगत अभिव्यक्ति हैं
✍️किशन कुमार जोशी

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