जय हिन्द साथियों...
(अपराधियों को धर्म का चोला पहनाकर साम्प्रदायिकता के पैर पूजती है पार्टियाँ जनता कब बोलेगी इन पर धावा। )
साथियों आप सब को पता होगा की देश में नारी की सुरक्षा पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गयें हैं न ही किसी सरकार ने उसकी सुरक्षा हेतु कोई नीतियाँ बनाई है, अपराधी जिंदगी बर्बाद कर देता, या जीवन ही खत्म कर देता है, सजा के रूप में उस पर कोई ख़ास कार्यवाही नहीं होती और कुछ ही समय बाद आरोपी बाहर आ जाता है और जनता उस कृत्य को भूल जाती है जनता में मनोरंजन के रूप में यह 20 दिन तक छाया रहता है महीने ,दो महीने बाद कुछ याद नहीं सब शांत फिर कोई घटना घटती है तो फिर जनता गहरी नींद से उठती है और नाच गा कर पैर पटक कर अगली घटना तक सो जाती है लेकिन इस बीच कुछ लोग कुछ पार्टियाँ खास कर जो सत्ता में होती है वो इसे साम्प्रदायिकता में बदलने की कोशिश करती है अपने वोट बैंक के लिए जमीन पर नाक रगड़ती है और यह हर पार्टी की कहानी है अबकी बार भी कुछ ऐसा ही हुआ।
हैदराबाद कृत्य पर पुलिस प्रेस वार्ता के कुछ घंटो पहले ही चारों आरोपी के नाम को जारी कर दिया गया थे हालांकि, बलात्कार की घटना को भाजपा के सदस्यों, पार्टी के समर्थक और मीडिया ने सांप्रदायिक रंग दिया केवल मोहम्मद पाशा का नाम लेकर ।
1.भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने केवल मुस्लिम समुदाय से आने वाले आरोपी का नाम हाईलाइट किया।
2.ऐसा ही कुछ, ओडिशा के राज्य संयुक्त महासचिव (संगठन) अमितव चक्रवर्ती और बीजेपी आईटी, सोशल मीडिया कैंपेन कमेटी के खेमचंद शर्मा ने भी किया।
3.आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित, जिन्हें अक्सर गलत सूचना साझा करते हुए देखा जाता है, एक खबर साझा की जिसमें चारों आरोपियों के नाम लिखे थे। हालांकि, दीक्षित ने अपने ट्वीट में सिर्फ मोहम्मद का नाम ही साझा किया था।
4.इस बलात्कार और हत्या की खबर प्रकाश में आने के बाद, ट्विटर पर टॉप ट्रेंड था – #Balatkari_Mohammed_Nikala.
5.भ्रामक सूचनाओं में सबसे लोकप्रिय नाम – प्रशांत पटेल उमराव ने ट्वीट करते हुए लिखा, “मोह्हमद पाशा ने अपने साथियों के साथ हैदराबाद में एक डॉक्टर का बलात्कार कर जला दिया। वे मानवता के लिए खतरा है और उनके निशाने पर हिन्दू महिला है।”
अब मैं पूछता हूँ क्या वो न्याय मांग रहे थे या साम्प्रदायिकता फैला रहे थे अपराध करेगा तो उसे सजा मिलेगी फिर वो हिन्दू सम्राट हो या मुस्लिम सरताज ऐसी सामाजिक विकृति को दूर करने के लिए जनता को सांप्रदायिकता के रंग में रंगे बिना भारत की हर नारी की सुरक्षा का बीड़ा उठाना चाहिए और सत्ता चाहे किसी की हो उस पर प्रेसर दिया जाना चाइए कठोर सजा को निर्धारित करने के लिए क्योंकि मोमबत्तियां महंगी हो गयी है जलते जलते, लेकिन अपराध उतने ही सस्ते।
✍️किशन कुमार जोशी
#Kishan Joshi
फेसबुक से साभार- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1545137518969721&id=100004204628333

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