जय हिंद साथियों...
आज़ादी से पहले कांग्रेस ही अंग्रेज़ों से अहिंसक ढंग से लड़ने का सबसे बड़ा मंच था। हर विचार का व्यक्ति वहीं जाता था। इसमें सुभाष से लेकर पटेल तक शामिल थे। ऐसे में आज़ादी के बाद उन नेताओं पर कांग्रेस की ठेकेदारी उतनी ही गलत है जितना “आज़ादी की लड़ाई लड़नेवाले महापुरुषों के मामले में गरीब” भाजपा का ऐसे नेताओं को नेहरू-गांधी के खिलाफ इस्तेमाल करना।
अगर कांग्रेस वाकई ठेकेदारी करना पसंद करती है तो फिर माने कि जिन्ना और हेड़गेवार भी उसके ही सदस्य थे।
यूं भी आज की कांग्रेस इंदिरा द्वारा बनाई गई थी जिसका पुरानी कांग्रेस से सिर्फ उतना ही लेनादेना है कि बस इनका नाम ही एक है। ऐसे में भावुक होकर कांग्रेस से जुड़नेवाले बस खुद को ठग रहे हैं। ये खुद को वैसा ही ठगना है कि बीजेपी से कोई इसलिए जुड़ जाए क्योंकि वो “हिंदुओं की पार्टी “ है।
कांग्रेस से जुड़ें, बीजेपी से जुड़ें या फिर किसी और से लेकिन वजह भावुकता नहीं प्रैक्टिकल डेवलपमेंट होना चाहिए।
#philosophy, #politics


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